प्रशासक गंगाबिशन को हटाने का आदेश अवैधानिक, उच्च न्यायालय ने दिया आदेश
by
Dolat Suthar
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जुलाई 08, 2025
राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने याचिकाकर्ता 8 पीएसडी बी, रावला के प्रशासक गंगाबिशन पुत्र सोहन लाल की ओर से दायर एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 12160/2025 पर 07 जुलाई को अपना निर्णय दिया है। इसके अंतर्गत याचिकाकर्ता के विरुद्ध शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के अंतरिम आदेश पर स्थगन आदेश दिया गया है।
संक्षिप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में प्रतिवादी हैं - • राजस्थान राज्य, सचिव, पंचायत राज विभाग, राजस्थान सरकार, सचिवालय, जयपुर के माध्यम से। • अतिरिक्त आयुक्त सह उप सचिव-II, (जांच), पंचायत राज विभाग, राजस्थान सरकार, सचिवालय, जयपुर। • संभागीय आयुक्त, बीकानेर संभाग, बीकानेर। • मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद श्री गंगानगर, जिला श्री गंगानगर। • विकास अधिकारी, पंचायत समिति घड़साना, जिला श्री गंगानगर। • जिला कलक्टर, जिला श्री गंगानगर। इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जेएस भालेरिया रहे हैं वहीं प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी और निशांत गाबा (मुदित नागपाल के लिए) रहे हैं।
न्यायालय के आदेश के अनुसार -
01. याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता जेएस भालेरिया ने न्यायालय का ध्यान दिनांक 01.05.2025 के अंतरिम आदेश की ओर आकर्षित किया तथा प्रस्तुत किया कि विभाग द्वारा पारित दिनांक 10.07.2024 के आरोप-पत्र के ज्ञापन के अनुसरण में याचिकाकर्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी। याचिकाकर्ता की रिट याचिका संख्या 20679/2024 में आयुक्त, बीकानेर को इस न्यायालय द्वारा स्थगन दिया गया है।
2. यह दावा करते हुए कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए आरोप वर्ष 1991 के हैं, विद्वान अधिवक्ता ने दावा किया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए राज्य सरकार द्वारा दिनांक 16.06.2025 के आदेश द्वारा याचिकाकर्ता को प्रशासक के पद से हटाने का पारित किया गया विवादित आदेश अवैधानिक तथा विपरीत है।
3. नोटिस जारी करें। स्थगन आवेदन की सूचना भी जारी करें, जिसका छह सप्ताह के भीतर जवाब दिया जाए।
4. इस बीच, दिनांक 16.06.2025 के आदेश (अनुलग्नक-पी/14) का प्रभाव तथा संचालन स्थगन रहेगा।
5. अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी और निशांत गाबा ने प्रस्तुत किया कि उन्होंने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश नियम 10 के तहत अभियोग चलाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। उक्त आवेदनों को अभिलेख के साथ संलग्न किया जाए ताकि प्रतिवादियों को नोटिस दिए जाने के बाद उन पर विचार किया जा सके।
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